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भले होली, दीवाली, तीज की खुशियां मनाना तुम,

भले ही कामयाबी के नये सपने सजाना तुम,

अगर जो चाहते हो वो गुलामी फिर से ना आएं,

मिटे जो देश की खातिर नहीं उनको भुलाना तुम |


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