वाणी–वन्दना

 
 

कितने दधीचियों ने अस्थियों का दिया दान

 
 

सबके दिलों में ‘हिन्दुस्तान होना चाहिए

 
 

हर भारतीय को सुभाष होना चाहिए

 
 

शत्रु-नाश-हेतु काल विकराल हम है

 
 

शिवाजी मराठा सरदार को प्रणाम हैं

 
 

गुरुजी की पावन कहानी याद कीजिए

 
 

आन-बान वाले राजस्थान को प्रणाम है

 
 

राणा जी प्रताप की तपन को नमन है

 
 

लक्ष्मीबाई तेरी तरुणाई को नमन् हैं

 
 

दिल्ली चलो वाली ललकारों को नमन हैं

 
 

सेल्युलर जेल की दीवारों को नमन् है

 
 

हुए जो शहीद, हम सबके दुलारे थे

 
 

तीज

 
 

प्रेम के प्रसंग रसवाली होली आई रे

 
 

महकती मारीशस माटी को प्रणाम है

 
 

सूरीनाम को प्रणाम है

 
 

वन्दे मातरम्

 
     
 

 

दिल्ली चलो वाली ललकारों को नमन हैं

 

 

जिनके लहू ने रचा क्रांति वाला इतिहास

जलियाँवाले बाग के शिकारों को नमन है

शान्ति औ अहिंसा के विचारों को नमन् और

क्रान्ति के गगन के सितारों को नमन् हैं

आजादी की डोली के कहारों को नमन् और

लाला जी की पीठ के प्रहारों को नमन् हैं

तुम मुक्षे ख़ून दो औ मैं तुम्हें आजादी दूँग़ा

दिल्ली चलो वाली ललकारों को नमन् है

 

 
 
     
 

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