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प्रवासी गीत
(भारतवंशी गौरव की सुगंध)
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सत्यम्
शिवम् सुन्दरम्, सत्यम् शिवम् सुन्दरम् –
2
तव अभिनन्दन
प्रिय प्रवासी, स्वागत वंदन प्रिय प्रवासी
– 2
हरेक
प्रवासी के अन्तर में धड़के हिन्दुस्थान
हर भारतवंशी
के दिल में धड़के हिन्दुस्थान
भले बसे हों
जाकर अमरीका, यू॰के॰, जापान,
रशिया या ओमान
धड़कता
प्यारा हिन्दुस्थान, नयन का तारा हिन्दुस्थान
जहां से
न्यारा हिन्दुस्थान……………………
गुजराती,
कन्नड़, कश्मीरी, उड़िया या बंगाली
असमी,
पंजाबी और मराठी, मणिपुरी, मलयाली,
भोजपुरी, मलयाली
छत्तिसगढ़िया, तमिल, मालवी, हिमाचली, गढ़वाली,
हरियाणी, गढ़वाली
परमशौर्य की
परम्पराओं वाला राजस्थान
बलिदानों की
परम्पराओं वाला राजस्थान
भिन्न-भिन्न, भाषा-भाषी पर सबकी इक पहचान,
सबकी इक पहचान
धड़कता
प्यारा हिन्दुस्थान…………………
शक्ति-भक्ति
की विजय पताका दुनियां में लहराते
तीज और
त्यौहारों पर घर आंगन सदा सजाते
होली,
दीपावली, ईद, क्रिसमस की खुशी मनाते
रक्षाबंधन,
ओणम, पोंगल, बीहू मन हर्षाते,
मिल उल्लास मनाते
भारत की
माटी से महके जिनके तन-मन-प्रान
मन में अमृत
जल कल-कल गंगा मां का वरदान,
नदियों का वरदान
धड़कता
प्यारा हिन्दुस्थान…………………
मेहनतकश
मजदूर गये जो गिरमिटिया कहलाये
तुलसी-कबिरा
की चौपाई-साखी राह दिखाये
खून पसीने
की सुगन्ध से वीराने महकाये,
वीराने मुस्काये
फिजी,
गयाना, त्रिनिडाड, मारीशस, सूरीनाम
सात समन्दर
पार बसीं जा भारत की संतान,
भारत की संतान
धड़कता
प्यारा हिन्दुस्थान…………………
खाड़ी देशों
में माली और कारीगर बन धाये
कदम-कदम
छायी बहार घर-द्वारे खुशी मनाये
मेहनत-कारीगरी देख हरियाली भी हरषाये,
हर मौसम हरषाये
मध्य एशिया
मरूभूमि में खिला दिये उद्यान
डगर-डगर हर
घर-आंगन है मेहनत पे कुर्बान,
मेहनत पे कुर्बान
धड़कता
प्यारा हिन्दुस्थान……………………
अमरीकी धरती
पे भी अपनी पहचान बनायी
अमरीका,
यू॰के॰ औ कनाडा की भी शान बढ़ायी
डाक्टर औ
वैज्ञानिक बन उन्नति की राह दिखायी
धर्मस्थलों
में सदभावों की गूंजे शहनाई,
नित गूंजे शहनाई
श्रेष्ठ
सिद्ध कर दिया जगत में निज कंप्यूटर ज्ञान
गूंजा रहे
सारे जग में भारत मां का गुणगान,
भारत का गुणगान
धड़कता
प्यारा हिन्दुस्थान………………
दर्शन,
ज्योतिष और योग की जग में अलख जगायी
सेवा, सत्य,
अहिंसा वाली जीवन ज्योति जलायी
सारी वसुधा
इक कुटुम्ब की पावन रीति निभायी,
जग को रीति सिखायी
नवयुगीन
बेला में भी संस्कारों का आह्वान
भारतवंशी
बने जगत में गौरव के दिनमान,
संस्कृति के दिनमान
धड़कता
प्यारा हिन्दुस्थान………………
चाणक्य के अर्थशास्त्र को वर्तमान में जाना
हिन्दुस्थानी अर्थशक्ति को दुनियां ने पहचाना
रहे जहां भी
तन-मन-धन से सबको अपना माना,
जग को अपना माना
अपनी मेहनत
प्रतिभा से ही बने आज धनवान
भारतवंशी
धनकुबेर जग में पाते सम्मान,
पाते सब सम्मान
धड़कता
प्यारा हिन्दुस्थान……………
संकल्पों का
परचम कर ले आगे बढ़ते जाएं
हो निर्भीक,
निडर उन्नति के पर्वत चढ़ते जाएं
देश, धर्म,
संस्कृति की रक्षा का भी बिगुल बजाएं,
रक्षा बिगुल बजाएं
पश्चिम की
विकृतियों में गाते शुचिता का गान
शाश्वत और
सनातन अपना ज्ञान और विज्ञान,
दिव्य पुरातन ज्ञान
धड़कता
प्यारा हिन्दुस्थान………………
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