Gajender Solanki :: Hindi Kavi, Geetkar, Gayak, Fine Artist, Yog Sadhak
एक बूँद हूँ पर अन्तस में मैने सागर को पाया है, बनने को सागर बन जाउँ तटबन्धों से डर लगता है| सम्बन्धों से डर लगता है| अनुबन्धों से डर लगता है|
 चित्रदीर्घा विदेश यात्रा                                   
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