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एक बूँद हूँ पर अन्तस में मैने सागर को पाया है, बनने को सागर बन जाउँ तटबन्धों से डर लगता है| सम्बन्धों से डर लगता है| अनुबन्धों से डर लगता है|
  भोर की किरण  
  क्रान्ति-कलश  
  मन का पंछी  
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
   
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